गोस्वामी तुलसी दास जी के बारे में सम्पूर्ण जानकारी

सभी पाठक गण को मेरा नमस्कार

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अगर आप tulsi das jivan parichay in hindi के बारे में जानना चाहते हैं तो, मैं अपने लेख के माध्यम से आपको उनके संपूर्ण जीवन रचनाएं, गुरु , आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दूंगा  l

रामचरितमानस जैसे महान ग्रंथ के रचयिता, महान कवि, तथा एक महान संत, गोस्वामी तुलसीदास के बारे में कौन नहीं जानता l अगर आप भगवान राम को जानते हैं, रामचरितमानस को जानते हैं, तथा हनुमान चालीसा के बारे में आपको पता है  l तो आप निश्चित रूप से तुलसीदास जी के बारे में जरूर जानते होंगे l

आज मैं अपने लेख के माध्यम से आपको, महान संत गोस्वामी तुलसीदास के बारे में संपूर्ण जानकारी देने का प्रयास करूंगा  l मैं आपको गोस्वामी जी के प्रारंभिक जीवन ,शिक्षा ,दीक्षा, गुरु, तथाउनके अंतिम जीवन तक की जानकारी आपको उपलब्ध करा सकू यह मेरा सौभाग्य होगा l

तुलसीदास का जीवन परिचय हिंदी में(tulsi das jivan parichay in hindi)

 पूरा नाम  गोस्वामी तुलसीदास
 बचपन का नाम  राम बोला
 उपनाम  गोस्वामी
 जन्मतिथि  1511
 जन्म स्थान  राजापुर ,बांदा ,उत्तर प्रदेश
 मृत्यु  1623
 मृत्यु के समय उम्र  लगभग 112 वर्ष
 मृत्यु का स्थान  वाराणसी ,उत्तर प्रदेश
 पिता का नाम  आत्माराम दुबे
 मां का नाम  हुलसी
 पत्नी का नाम  रत्नावली
 बच्चों का नाम  तारक नाम का एक पुत्र  बचपन में ही मृत्यु हो चुकी थी
 धर्म  हिंदू
 गुरु  संत नरहरी दास(baad में रामनद ji)
 दर्शन  वैष्णव
 कर्म क्षेत्र  कवि, समाज सुधारक, महान संत
 प्रमुख रचनाएं  रामचरितमानस ,दोहावली, कवितावली, गीतावली ,विनय पत्रिका, हनुमान चालीसा आदि
 भाषा  अवधि, हिंदी
 आराध्य देव  भगवान राम
 कर्मभूमि  चित्रकूट
 समकालीन शासक  अकबर मुगल वंश
 सबसे प्रसिद्ध रचना  रामचरितमानस एवं हनुमान चालीसा
 सबसे प्रसिद्ध कथन  सिया राम मय सब जग जानी l कराऊं प्रणाम जोरि जुग पाडी ll रामचरितमानस का प्रसिद्ध दोहा

 

गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय(tulsi das jivan parichay in hindi)

गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के महान संत समाज सुधारक तथा एक कवि थे l इनका जन्म राजापुर ,बांदा, उत्तर प्रदेश में 1511 में हुआ थाl रामचरितमानस इनका महान गौरव ग्रंथ हैl, इन्हें आदि  कवि रामायण के रचयिता महान कवि वाल्मीकि जी का अवतार भी माना जाता है  l

महाकाव्य श्रीरामचरितमानस को विश्व के 100 सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय काव्य में 46 व स्थान मिला हैl

जन्म के संबंध में चर्चित प्रसंग

गोस्वामी तुलसीदास जी के जन्म के विषय में बहुत ही चर्चित प्रसंग सुनने को मिलता हैl,जिसमें कहा जाता है कि तुलसीदास जी अपने माता के गर्भ में 12 महीने तक रहेl कुछ प्रसंगों में तो यहां तक कहा गया, कि जन्म के उपरांत, वे एक सामान्य बालक की भांति हष्ट पुष्ट थे तथा उनके मुंह में दांत भी थे l

रामबोला तुलसीदास जी के बचपन का नाम है, इसके पीछे भी एक चर्चित प्रसंग सुनने को मिलता है, जिसमें कहा जाता है कि तुलसीदास जी का जब जन्म हुआ तो उन्होंने सबसे पहले राम नाम बोला, अर्थात राम का नाम लियाl जिसके कारण इनका नाम राम बोला पड़ा l

तुलसीदास जी की शिक्षा एवं दीक्षा

•तुलसीदास जी की प्रारंभिक शिक्षा गुरु नरहरी दास जी के आश्रम में हुई l

• श्री नरहरी दास द्वारा ही तुलसीदास जी का नाम रामbola से तुलसीदास रखा गया था l

• नरहरी दास जी द्वारा ही प्रारंभ में रामायण का ज्ञान तुलसीदास जी को कराया गया l

• बाद में गोस्वामी तुलसीदास जी श्री संप्रदाय के आचार्य रामानंद जी के शिष्य बने, तथा उन्हीं से  आध्यात्मिक दीक्षा ग्रहण कियाl

तुलसीदास जी का विवाह

तुलसीदास जी का विवाह रत्नावली नामक एक अत्यंत खूबसूरत एवं विद्वान महिला के साथ हुआ था l कहा जाता है कि तुलसीदास जी रत्नावली को अत्यधिक प्रेम करते थे,lउस समय  उन्हें रत्नावली के अतिरिक्त कोई दिखाई नहीं देता थाl उन्होंने अपने सारे कार्य धंधे छोड़कर सिर्फ रत्नावली के बारे में सोचते रहते थे l

तुलसीदास का तपस्वी बनना

कहा जाता है कि तुलसीदास जी की तपस्वी जीवन की ओर बढ़ने के पीछे एक बहुत ही रोचक प्रसंग है l इस प्रसंग के अनुसार उनका विवाह 1526 में रत्नावली नामक एक खूबसूरत और विद्वान महिला के साथ हो गया था l तुलसीदास जी रत्नावली के प्रति बहुत ही आसक्त हो गए थे l वह किन्हीं भी परिस्थितियों में अपनी पत्नी से अलग नहीं रह पाते थेl

इसी दौरान उनकी पत्नी रत्नावली मायके चली गई, और रत्नावली के पीछे-पीछे तुलसीदास भी ससुराल पहुंच गएl यह सब देख उनकी पत्नी रत्नावली को अपने मायके में बहुत शर्म महसूस हुआ l और उन्होंने गुस्से में तुलसीदास जी से कहा जितना प्रेम आप इस हाड मांस के शरीर से करते हैं उतना प्रेम अगर भगवान से करते तो भगवान साक्षात आपको मिल जाते l

अपनी पत्नी द्वारा कहे गए यह वचन तुलसीदास के सीधे हृदय में लगे, यहीं से उनके मन में वैराग्य आना प्रारंभ हो गया था  l और बाद में उन्होंने भगवान राम को अपना आराध्य मानते हुए गृहस्थ जीवन से संन्यास ले लिया l

गोस्वामी जी का हनुमान जी से भेंट

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कहा जाता है कि तुलसीदास जी की हनुमान जी से भेंट, बनारस के घाट पर हुई थी l जहां पर हनुमान जी साधु के भेष में राम नाम का जप कर रहे थे l अचानक तुलसीदास जी और साधु से मार्ग में टकरा जाते हैंl तब तुलसीदास जी कहते हैं, है महाशय मैं आपको पहचान लिया है अब मैं आपको छोड़कर नहीं जा सकताl वहीं पर श्री हनुमान जी ने तुलसीदास जी को दर्शन दिए थे l

गोस्वामी तुलसीदास जी का भगवान राम से भेंट –

tulsi das jivan parichay in hindi
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गोस्वामी तुलसीदास जी की भेंट भगवान श्री राम से चित्रकूट के घाट पर हुई थीl इसका स्पष्ट प्रमाण रामचरितमानस के 1 दोहे से मिलता है l जिसमें तुलसीदास जी कहते हैं – चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीर l तुलसीदास चंदन घिसे तिलक देत रघुवीरll

कहा जाता है कि तुलसीदास जी की भगवान श्री राम से प्रथम भेंट कामदगिरि की परिक्रमा के दौरान हुई थी, जिसमें उन्होंने दो राजकुमारों को अपनी ओर आते देखा था l परंतु तुलसीदास जी भगवान श्री राम को पहचान ना सके l

इस घटना के एक दिन बाद जब तुलसीदास जी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के किनारे, अपने लिए चंदन बना रहे थे, इस दौरान भगवान श्री राम अपने छोटे भाई लक्ष्मण के साथ आते हैं, l तथा अपने हाथों से तुलसीदास जी को चंदन लगाते हैंl लेकिन अभी भी तुलसीदास जी भगवान श्रीराम को नहीं पहचान पाए l तब वहां पर उपस्थित एक तोते द्वारा इस दोहे को कहा गया-

चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीर l तुलसीदास चंदन घिसे तिलक देत रघुवीरll तब तुलसीदास जी ने भगवान श्री राम को पहचान लिया और उनके चरणों पर गिर पड़े l

गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रसिद्ध रचनाएं –

गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने लंबे आध्यात्मिक जीवन में विभिन्न प्रकार की रचनाओं की रचना की है, जिनमें प्रमुख हैं- रामचरितमानस, गीतावली, कवितावली, विनय पत्रिका, रामशलाका, हनुमान चालीसा,  आदिl

गोस्वामी जी कुछ रचनाओं का संक्षिप्त वर्णन-

कवितावली-

इसे तुलसीदास जी की कविता का कलंक के नाम से जानते हैं, यह अभी प्रमाणिक हैl

दोहावली

इसके अधिकांश दोहे रामचरितमानस से लिए गए हैं l

गीतावली-

इसमें रामायण के प्रसिद्ध कांड भारत और राम के मिलन को गीत के रूप में बताया गया है l

तुलसीदास जी की मृत्यु -(tulsi das jivan parichay in hindi)

तुलसीदास जी ने एक बहुत लंबा जीवन जिया l उन्होंने लगभग 112 वर्ष की आयु प्राप्त की थी l उनकी मृत्यु के स्थान के बारे में अभी भी विरोधाभास हैl लेकिन सर्वाधिक मान्य मत यही है कि उन्होंने अपना आखिरी जीवन वाराणसी अर्थात काशी में बिताया थाl जहां पर उनकी मृत्यु 1623 ईस्वी में हुई थी l

निष्कर्ष- प्रिय पाठक गान मैंने अपने लेख tulsi das jivan parichay in hindi के माध्यम से आपको उनके जीवन की संपूर्ण वृतांतों को बताने का प्रयास किया हैl लेकिन अगर कहीं गलत तथ्य हो तो उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं l और अगर मेरा लेख tulsi das jivan parichay in hindi आपको पसंद आए तो हमें कमेंट अवश्य करेंl

FAQ ( tulsi das jivan parichay in hindi)

तुलसीदास का जन्म कब हुआ?

1511

तुलसीदास जी का जन्म कहां हुआ था?

राजापुर ,बांदा, उत्तर प्रदेश

तुलसीदास ने रामायण कब लिखी थी?

16वीं शताब्दी में

रामायण को लिखने में कितना समय लगा?

2 वर्ष 7 मा 26 दिन

तुलसीदास के बचपन का क्या नाम था?

राम बोला

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