स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय2023 Swami Vivekanand ka Jivan Parichay right now

नमस्कार दोस्तों🙏🙏

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Biographyjaano ब्लॉग में आपका स्वागत है, अगर आप Swami Vivekanand ka Jivan Parichay के बारे में जानना चाहते हैं, तो आज मैं अपने इस लेख के माध्यम से, स्वामी जी के संपूर्ण जीवन के बारे में आपको बताने का प्रयास करूंगा l

सनातन  धर्म के ध्वजवाहक स्वामी विवेकानंद को कौन नहीं जानता, स्वामी विवेकानंद जी का पूरा जीवन भारत की एकता स्वतंत्रता विकास तथा सनातन सनातन धर्म के उत्थान के लिए समर्पित था l आज हम पढ़ेंगे की स्वामी विवेकानंद जो शुरुआत में एक आम इंसान की तरह ही जीवन व्यतीत कर रहे थे ,लेकिन आगे चलकर अपने गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस जी के प्रभाव ने उनका जीवन बदल दिया l

और स्वामी विवेकानंद जी के जीवन में यह बदलाव, मनुष्य के जीवन में एक नया विचार लेकर आया, उनका यह विचार उस समय भी प्रसांगिक था, तथा आज भी बहुत महत्वपूर्ण है, जो हमारे जीवन को एक नई दिशा प्रदान कर सकता है  l

Swami Vivekanand ka Jivan Parichay पढ़कर  हम भी अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं, तथा भविष्य एवं वर्तमान की चुनौतियों का सामना  एक बेहतरीन ढंग से कर सकते हैंl स्वामी विवेकानंद जी के विचार हमारे जीवन में ऊर्जा प्रदान करने के साथ हमारा मार्गदर्शन भी करते हैं l

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय( Swami Vivekanand Jivan Parichay)

सनातन संस्कृति में स्वामी विवेकानंद जी का वही स्थान है जो, आदि गुरु शंकराचार्य जी का है, l जिस प्रकारआदि गुरु शंकराचार्य जी ने  हजारों साल पहले सनातन संस्कृति की रक्षा की थी, उसी प्रकार स्वामी विवेकानंद जी का भी विचार उस समय आया जब हमारे देश को एक क्रांतिकारी,आध्यात्मिक तथा मार्गदर्शक विचारों की आवश्यकता थी , l स्वामी जी को  भारतीय वैदिक सनातन संस्कृति की जीवंत प्रतिमूर्ति के रूप में जाना जाता है l उन्होंने अपने विचारों के माध्यम से पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति धर्म के मूल आधार और नैतिक मूल्यों का प्रचार प्रसार किया l

Swami Vivekanand ka Jivan Parichay

स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता के एक संपन्न परिवार में हुआ थाl स्वामी विवेकानंद के पिता जी का नाम विश्वनाथ दत्त तथा जो पैसे से एक नामी एवं सफल वकील थे, उस समय वे कलकत्ता  ( वर्तमान कोलकाता) के उच्च न्यायालय में Attorny At law के पद पर कार्यरत थे l उनकी माता भुवनेश्वरी देवी थी जो एक धर्म परायण बुद्धिमान तथा विकासवादी सोच की महिला थी l

स्वामी जी की माता जी का प्रभाव स्वामी जी के जीवन में बहुत गहरा पड़ा, शायद यही वजह थी स्वामी विवेकानंद को उनकी मां से ही हिंदू धर्म एवं सनातन संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला l

स्वामी विवेकानंद जी के विचार दुनिया के सामने उस समय आए जब सनातन संस्कृति पर चौतरफा हमला हो रहा था, क्योंकि एक तरफ अंग्रेज इस संस्कृति को हेय दृष्टि से देखते थे l तथा दूसरी ओर मुस्लिम कम्युनिटी सनातन संस्कृति को विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से नीचा दिखाने की कोशिश करती थी l रही सही कसर उस समय के नव किताबी बुद्धिजीवियों ने सनातन संस्कृति पर प्रहार करके पूरी कर दी l

स्वामी विवेकानंद जी के विचार सनातन संस्कृति से प्रभावित हैं, परंतु उनके विचार में व्यापकता है, जो धर्म के संकुचित विचारों से परे है, जो प्रायः  सभी धर्मों के लोगों के लिए एक मार्गदर्शन प्रदान करता है  l

सनातन संस्कृति के मूल विचारों को जन-जन तक नवीन एवं परिष्कृत रूप में पहुंचाने का श्रेय स्वामी विवेकानंद जी को ही जाता है l उन्होंने अपने आध्यात्मिक ज्ञान से सभी मनुष्यों और विशेष रूप से युवाओं को एक नई राह दिखाई, यही वजह है कि उन्हें युवाओं का प्रेरणास्रोत कहा जाता है l

उनके विचार में युवा ही किसी देश की ताकत है, जो देश की दिशा एवं दशा में सकारात्मक परिवर्तन कर सकते है l उनके इन्हीं विचारों को जन जन तक पहुंचाने के उनका जन्मदिन 12 जनवरी के दिन युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है l

स्वामी विवेकानंद जीवन परिचय संक्षिप्त ( Swami Vivekanand Jivan Parichay in short)

नाम            नरेन्द्रनाथ दत्त 

जन्म           12 जनवरी 1863

मृत्यु            4 जुलाई 1902

पिता            विश्वनाथ दत्त

माता          भुवनेश्वरी देवी

गुरू            राम कृष्ण परम हंस

स्वामी विवेकानंद का प्रारंभिक जीवन( Swami Vivekanand ka Jivan Parichay)

स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863  में एक संपन्न बंगाली परिवार में हुआ था l स्वामी जी के पिताजी श्री विश्वनाथ दत्त एक सफल वकील और विद्वान थे l उस समय भारत में अंग्रेजों का शासन चल रहा थाl अतः विश्वनाथ दत्त भी अंग्रेजी विचारों से प्रभावित हुए बिना नहीं रहे l वही स्वामी जी की माता जी श्री भुवनेश्वरी देवी जो एक धर्म परम विद्वान बुद्धिमान तथा अपनी संस्कृति के प्रति समर्पित एक स्वाभिमानी महिला थी l

स्वामी जी के पिताजी श्री विश्वनाथ दत्त अंग्रेजी शिक्षा तथा उनकी व्यवस्था से काफी प्रभावित थे, अतः उनकी इच्छा थी नरेंद्र नाथ दत्त  ( स्वामी विवेकानंद) अंग्रेजी भाषा तथा अंग्रेजी शिक्षा तथा  अंग्रेजी तौर तरीके को  ही अपनाएं, क्योंकि इन विचारों को वह आधुनिक समझते थे  l

वहीं उनकी माता जी के विचार उनके पिता से अलग थे, स्वामी जी की माताजी अंग्रेजी शिक्षा अंग्रेजी भाषा अंग्रेजी तौर-तरीकों की  विरोधी नहीं थी,  लेकिन वह धर्म संस्कृति और अपनी परंपरा को, भुलाकर आधुनिकता को अपनाना उचित नहीं समझती थी l

विधाता को तो कुछ और ही मंजूर था,1884 मे स्वामी जी के पिताजी श्री विश्वनाथ दत्त जी की मृत्यु हो गई, इस दुखद घटना ने स्वामी जी के जीवन को एकदम से बदल कर रख दिया, जो परिवार अत्यंत संपन्न, संभ्रांत एवं सुख में जीवन व्यतीत कर रहा था, उस परिवार पर एकाएक कठिनाइयों की विपदा आ पड़ी l

अब घर के हालात बहुत खराब हो चुके थे और नरेंद्र दत्त ( स्वामी विवेकानंद) के ऊपर असमय जिम्मेदारियां आ चुकी थी l इन जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए स्वामी जी ना तो तैयार थे और ना ही अभ्यस्त l

स्वामी विवेकानंद की शिक्षा( Swami Vivekanand education)

स्वामी विवेकानंद की प्रारंभिक एवं उच्चतर शिक्षा, दोनों ही कोलकाता में संपन्न हुए  l 1871 में जब स्वामी विवेकानंद 8 साल के थे, तब उन्हें प्रारंभिक शिक्षा हेतु ईश्वर चंद्र विद्यासागर संस्थान में दाखिला दिया गया था  l

कुछ वर्षों तक स्वामी जी ने कोलकाता के ही स्टार्ट चर्च कॉलेज में दर्शनशास्त्र का भी अध्ययन किया है, यहां पर स्वामी जी द्वारा पश्चिमी विज्ञान, पश्चिमी अध्यात्म, पश्चिमी दर्शन, आधुनिकता, तथा यूरोपीय देशों के  इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त की l इसके बाद इन्होंने प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय कोलकाता में दाखिला लेने के लिए परीक्षा दी थी l जिसमें इनको प्रथम स्थान हासिल हुआ था l

स्वामी विवेकानंद जी अपने विद्यार्थी जीवन में, कभी भी स्कूल द्वारा प्रदत पुस्तकों पर ही निर्भर नहीं रहे, और ना ही शिक्षकों द्वारा पढ़ाने वाले विषयों तक सीमित l नरेंद्रनाथ दत्त ( स्वामी विवेकानंद) की रूचि स्कूली विषयों के अतिरिक्त अन्य विषयों पर भी थी l जिनमें धर्म-दर्श,न इतिहास ,सामाजिक विज्ञान,कला साहित्य,इतिहास,शामिल थे l वेद ,उपनिषद ,भगवत गीता, रामायण, महाभारत और पुराणों के अतिरिक्त अन्य धार्मिक बिसयों में  भी रूचि रखते थे l

स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस (Swami Vivekanand and Shri Ramkrishna paramhans )

नरेंद्र नाथ दत्त को स्वामी विवेकानंद बनाने में, श्री रामकृष्ण परमहंस जी का प्रमुख योगदान है l स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी दक्षिणेश्वर काली मंदिर के एक पुजारी थे l जबकि नरेंद्रनाथ दत्त ( स्वामी विवेकानंद) उस समय अपनी कॉलेज की पढ़ाई के साथ साथ,  जीवन यापन की कठिनाइयों से भी गुजर रहे थे l कहा जाता है कि जब स्वामी विवेकानंद रामकृष्ण परमहंस जी से मिले तो वह उनसे काफी प्रभावित हुए l

एक बार स्वामी विवेकानंद जी ने रामकृष्ण परमहंस से कहां की वह मां काली से उनके लिए आशीर्वाद स्वरुप उनकी ( स्वामी विवेकानंद की ) कठिनाइयों को खत्म करने के लिए कहे… तब रामकृष्ण परमहंस जी ने जवाब दिया..– तुम स्वयं मां काली के पास जाकर अपनी समस्या क्यों नहीं कहते.. l

स्वामी विवेकानंद अपनी समस्या लेकर मां काली के मंदिर में जाते हैं, परंतु मंदिर में पहुंचकर वह अपनी समस्याएं भूल जाते हैं, और मां काली से वैराग्य ,आत्मज्ञान तथा मानव जीवन के कल्याण हेतु प्रार्थना करने लगते हैं l यह सिलसिला कई दिनों तक रोज ऐसे ही चलता रहा, परंतु स्वामी विवेकानंद मंदिर में पहुंचकर अपनी समस्या मां काली से नहीं बता पाते थे  l

इस घटना ने स्वामी विवेकानंद के जीवन में अद्भुत बदलाव ला दिया l परंतु यह सब क्या हो रहा है स्वामी जी समझ नहीं पा रहे थे, l एक दिन उन्होंने स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी से कहा, मैं अपनी समस्या मंदिर में पहुंचकर मां काली को क्यों नहीं बता पा रहा हूं, तब स्वामी परमहंस जी ने कहा… तुम अपनी समस्या बताने के लिए इस धरती पर नहीं आए हो, बल्कि दूसरों की समस्या और अपनी संस्कृति तथा देश के वर्तमान समस्याओं से निजात दिलाने के लिए, आए हो  l

इस घटना ने स्वामी विवेकानंद जी के हृदय में रामकृष्ण परमहंस जी का अलग ही स्थान बना दिया l और रामकृष्ण परमहंस जी की ही कृपा से उन्हें आत्म साक्षात्कार हुआ फल स्वरुप नरेंद्र (स्वामी विवेकानंद)परमहंस जी के शिष्यों में प्रमुख हो गए, और संन्यास के बाद उनका नाम नरेंद्र नाथ दत्त से स्वामी विवेकानंद हो गया l

सन 1885 में कैंसर की वजह से स्वामी विवेकानंद जी के गुरु रामकृष्ण परमहंस जी की मृत्यु हो गई l गुरु के मृत्यु के उपरांत स्वामी जी ने गुरु के नाम से ही बाद में रामकृष्ण संघ की स्थापना की जो आगे चलकर रामकृष्ण मठ ,रामकृष्ण मिशन के रूप में पूरे विश्व में प्रसिद्ध है l

स्वामी विवेकानंद का शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन( Swami Vivekanand ka Jivan Parichay)

आज पूरे विश्व में सनातन धर्म, तथा दर्शन, को सम्मान के साथ देखा जाता है, परंतु अंग्रेजों के समय तक ऐसा नहीं था, किताबी विचार  तथा भोग वादी प्रवृत्ति ने इस से घृणा का पात्र बना दिया था l एक ऐसा देश जो प्राचीन काल में अपने स्वर्णिम सभ्यता की वजह से पहचाना जाता था, जो आज भविष्य की आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है, क्या आप विश्वास कर सकते हैं कि कुछ सदी पहले इसे सपेरों का देश कहा जाता था  l हमारे दर्शन का उपहास उड़ाया जाता थाl

Swami Vivekanand ka Jivan Parichay

फिर एक समय ऐसा भी आया जब पूरे विश्व को भारत के प्रति अपने दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता हुई.. जवाब है.. 11 सितंबर 1893 विश्व धर्म सभा शिकागो  l एक तरह से कहा जाए यह भारत की संस्कृति,दर्शन, तथा सनातन धर्म का नवजागरण काल है l

इस विश्व धर्म सभा में स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति ,वेदांत, हिंदू धर्म ,असहमति ,बौद्ध संप्रदाय, जैसे तमाम विषयों पर बात करते हुए कुल 6 संबोधन दिए l उनके यह विचार सिर्फ अमेरिका की जनता ही नहीं पूरे विश्व के लोगों को प्रभावित करने में सफल रहे l खासकर उन का वह संबोधन जिसमें उन्होंने कहा था मेरे अमेरिकी भाइयों एवं बहनों…. इस संबोधन के बाद लगातार 2 मिनट तक धर्म सभा तालियों से गूंजता रहा l

परंतु विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी जी के लिए पहुंचना इतना आसान नहीं था l प्रारंभ में जब गुजरात के कुछ शिष्यों द्वारा उन्हें विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लेने के लिए कहा गया तो उन्होंने इसे टाल दिया था l परंतु बाद में चेन्नई के शिष्यों द्वारा निवेदन करने पर उन्होंने विश्व धर्म सम्मेलन जाना स्वीकार किया था l

11 सितंबर 1893 का दिन विश्व इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा, स्वामी जी का यह भाषण ऐतिहासिक था… तथा लोगों का प्रेम अद्वितीय  l कहां जाता है कि इस भाषण के बाद स्वामी जी के इर्द-गिर्द हमेशा भीड़ बनी रहती थी l जिस पर धर्म सभा के आयोजक चुटकी लेते हुए कहते थे…. स्वामी विवेकानंद को जनता इतना लाड प्यार करती है यदि उन्हें लघु शंका भी आ जाए तो इस भीड़ से निकलना स्वामी जी के लिए कठिन हो जाएगा l

यह स्वामी विवेकानंद जी का ही विश्व पटल पर वह प्रभाव है की.. जब प्रसिद्ध साहित्यकार रोमा रोला ने भारत को जानने की इच्छा जताई तो गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने कहा यदि तुम भारत को जानना चाहते हो तो स्वामी विवेकानंद को पढ़ो  l

रामकृष्ण मिशन की स्थापना ( Ramkrishna Mission Foundation )

रामकृष्ण मिशन की स्थापना स्वामी विवेकानंद द्वारा 1 मई 1897 को बेलूर में किया गया l जिसे वर्तमान में बेलूर मठ के नाम से जाना जाता है l इस मिशन का उद्देश्य भारतीय दर्शन,अध्यात्म, तथा अपनी संस्कृति के प्रति लोगों में प्रेरणा जगाना है  l इस मठ के द्वारा  वर्तमान समय में अस्पताल स्कूल कॉलेज तथा कई कल्याणकारी योजनाओं को भी संचालित किया जाता है l

स्वामी विवेकानंद का क्रांति पर प्रभाव

स्वामी विवेकानंद के विचार सिर्फ अध्यात्म तक सीमित नहीं थे,  उस दौर में भारत मैं स्वतंत्रता संग्राम चल रहा था, अतः स्वामी जी के विचारों से स्वतंत्रता संग्राम भी  प्रभावित हुए बिना नहीं रहा l उन्होंने स्वतंत्रता को मानव जीवन का सर्वोपरि अंग माना था l उनके विचारों से सुभाष चंद्र बोस अरविंद घोष रविंद्र नाथ टैगोर चक्रवर्ती गोपालाचारी आदि  प्रभावित थे l

स्वामी विवेकानंद जी के साहित्य ( Swami Vivekanand literature)

स्वामी विवेकानंद जी एक अच्छे वक्ता ही नहीं वरन एक अच्छे चित्रकार लेखक और गायक भी थे l उनकी भाषा में अच्छी पकड़ थी, तथा उनके शब्दों में एक लय थी जो लोगों को बांध कर रखती थी लिए

संगीत कल्पतरु ,कर्म योग ,राजयोग, माय मास्टर ,वेदांत फिलॉसफी , आदि उनकी प्रमुख रचनाएं है l

स्वामी विवेकानंद जी की अनंत यात्रा ( Swami Vivekanand Nirvan)

स्वामी विवेकानंद जी का देहावसान कम आयु में ही हो गई थीl जब वह मात्र 39 वर्ष के थे, तभी वह ब्रह्मलीन हो गए l स्वामी जी का निधन 4 जुलाई 1910 को बेलूर मठ में हुआ था l बाद में उनके एक शिष्य द्वारा ऐसा कहा गया कि मृत्यु से ठीक पहले स्वामी जी द्वारा महासमाधि की बात कही गई थी l

स्वामी विवेकानंद जयंती ( Swami Vivekanand ki Jayanti  )

स्वामी विवेकानंद जी का विचार तथा दर्शन पूरे विश्व के लिए एक वरदान के समान है l स्वामी जी युवाओं को राष्ट्र की शक्ति के रूप में देखते थे l उनका मानना था कि राष्ट्र में कोई भी परिवर्तन सिर्फ युवा ही रह सकते हैं l अतः उनके दर्शन तथा अनमोल विचारों के सम्मान में उनके जन्मदिन 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है l

स्वामी विवेकानंद की उपलब्धियां…

स्वामी विवेकानंद सिर्फ धर्म उपदेश तक ही सीमित नहीं रहे, उनका दर्शन मानव मात्र से बढ़कर जीव मात्र की रक्षा था  l यही कारण है कि भारत समेत विश्व के अनेक महापुरुषों पर विवेकानंद जी के व्यक्तित्व और विचारों का प्रभाव पड़ा l सुभाष चंद्र बोस विवेकानंद जी को अपना आध्यात्मिक गुरु मानते थे l स्वामी जी की कुछ उपलब्धियां इस प्रकार है…

सनातन पुनरुद्धार

रामकृष्ण मठ की स्थापना

हिंदुत्व को लेकर पूरी दुनिया में विचारों में परिवर्तन.

4 स्वामी जी का नव वेदांत वाद.

स्वामी विवेकानंद जी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें….

1  स्वामी विवेकानंद जी गेरुआ वस्त्र पहनते थे,सन्यास इन्होंने मात्र 25 वर्ष की उम्र में ले लिया था l

2  स्वामी विवेकानंद जी ने पैदल ही पूरे भारत का भ्रमण किया है l

3  न्यूयॉर्क में वेदांत सोसाइटी की स्थापना स्वामी जी ने किया था

4  यदि तुम भारत को जानना चाहते हो तो स्वामी विवेकानंद को पर हो यह बात रविंद्र नाथ टैगोर ने कहा था

5  मैं दुनिया में सबसे पुरानी संत परंपराओं वाले देश से आया हूं… शिकागो धर्म सभा का एक अंश

स्वामी विवेकानंद जी पर पूछे जाने वाले कुछ प्रश्न..

प्रश्न  स्वामी विवेकानंद का जन्म कब हुआ?

उत्तर   12 जनवरी 1863 को.

प्रश्न स्वामी विवेकानंद क्यों प्रसिद्ध है..

उत्तर  किसको दिए दर्शन एवं उनके अनमोल विचारों द्वारा

प्रश्न  स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम क्या है?

उत्तर  नरेंद्रनाथ दत्त

प्रश्न  स्वामी विवेकानंद के गुरु का क्या नाम है?

उत्तर  रामकृष्ण परमहंस

लेखक की कलम से…

Swami Vivekanand ka Jivan परिचय लेख में  स्वामी विवेकानंद जी के जीवन के अंशों मे मैंने प्रकाश डालने का पूरा प्रयास किया है, परंतु कुछ चंद लाइनों में उनके व्यक्तित्व को समाया नहीं जा सकता l और तथ्यों में जहां कहीं चूकहो गई हो उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं 🙏🙏🙏.. इसलिए के विषय में आपका अगर कोई सुझाव हो तो मुझे कमेंट बॉक्स में कमेंट अवश्य कीजिएगाl

धन्यवाद🙏🙏

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