Premanand Ji Maharaj 2023 श्री प्रेमानंद जी महाराज का जीवन right now

प्रिय पाठक गण अगर आप Premanand Ji Maharaj के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है l अपितु उनके जीवन को किसी एक लेख के माध्यम  से संपूर्ण रूप से नहीं बताया जा सकता, परंतु मैं फिर भी उनके जीवन के प्रमुख अंशों को आपके समक्ष रखने का पूरा प्रयास करूंगा l

संत शिरोमणि श्री प्रेमानंद जी महाराज वर्तमान समय में सोशल मीडिया में सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले संतो  में से एक है, युटुब, फेसबुक,इंस्टाग्राम,प्रिंट मीडिया या फिर व्हाट्सएप स्टेटस के माध्यम से अपने संत शिरोमणि के विचारों को अवश्य सुना होगा l

अगर आप यह लेख पढ़ रहे हैं तो इसका मतलब यह हुआ कि आप भी संत शिरोमणि के विचारों से प्रभावित है, तथा उनके बारे में जानना चाहते हैं, बहुत सारे भक्त उन्हें पीले वाले बाबा के नाम से संबोधित करते हैं, हालांकि यह प्रेमानंद महाराज जी का कोई उपनाम नहीं है, किंतु उनके दिनचर्या में शामिल पीले वस्त्र तथा पीली वस्तुओं के कारण, उनके प्रशंसक तथा भक्त उन्हें केले बाबा के नाम से भी जानते हैं l

इस लेख के माध्यम से हम उनके जीवन के प्रमुख तथा प्रासंगिक अंशों को आपके समक्ष रखेंगे, मैं आपको यकीन दिलाना चाहता हूं कि इस लेख को अगर आप अंत तक पढ़ेंगे तो महाराज जी के संदर्भ में आपको कोई और लेख पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी और आप महाराज जी के विचारों से और ज्यादा प्रभावित होंगे….l

श्री प्रेमानंद जी महाराज Premanand Ji Maharaj

Premanand Ji Maharaj

वर्तमान समय में जब भी राधारानी के परम भक्तों का नाम लिया जाता है उसमें संत शिरोमणि श्री Premanand Ji Maharaj का नाम सबसे ऊपर है l महाराज जी का जन्म कानपुर उत्तर प्रदेश में एक सामान्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था, उनके माता का नाम श्रीमती रामा देवी  तथा पिताजी का नाम श्री शंभू पांडेय था l राधारानी भक्त श्री प्रेमानंद जी महाराज का बचपन का नाम श्री अनिरुद्ध पांडे था l

महाराज जी के दादाजी तथा उनके पिताजी भी संत मार्ग को अपनाया था, शायद परिवार की यही प्रेरणा उन्हें सन्यास के मार्ग की ओर प्रेरित किया।महाराज जी के ही शब्दों में उनके जीवन में आध्यात्मिकता के बीज अंकुरित होने के लिए, उनके पारिवारिक वातावरण का प्रमुख योगदान था l महाराज जी के जिज्ञासु प्रवृत्ति, घर का आध्यात्मिक वातावरण, और साधु-संतों तथा महात्माओं के सानिध्य ने और इसके अतिरिक्त संकीर्तन,सत्संग आदि ने  महाराज जी के जीवन में आध्यात्मिकता के बीज बोए l

प्रेमानंद जी महाराज Premanand Ji Maharaj

 

बचपन का नाम                अनिरुद्ध पांडे

जन्म स्थान                      कानपुर उत्तर प्रदेश

माता का नाम                   श्रीमती रामा देवी

पिता का नाम                   श्री शंभू नाथ पांडे

गुरु का नाम                     श्री गौरंगी शरण जी

 

श्री प्रेमानंद महाराज जी का प्रारंभिक जीवन  Premanand Ji Maharaj

महाराज जी का जन्म एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था, उनके उनका पारिवारिक माहौल प्रारंभ से ही आध्यात्मिक था, महाराज जी के पूर्व उनके दादाजी तथा पिताजी ने भी संत मार्ग को स्वीकार किया था, l शायद यही पारिवारिक वातावरण में महाराज जी को संत मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया l

महाराज जी को 11 वर्ष की उम्र में ही, लगभग सभी प्रकार के चालीसा कंठस्थ हो गए थे  l उनकी दिनचर्या में प्रतिदिन मंदिर जाना और कम से कम 10 से 15 प्रकार के चालीसा का पाठ करना, तथा सनातन संस्कृति के अनुसार तिलक लगाकर स्कूल पढ़ने जाना आदि शामिल थे  l

उनके जिज्ञासु स्वभाव को सत्संग ने और बढ़ा दिया, अब वह 11 वर्ष के बच्चे की भात ना सोच कर एक अनुभवी व्यक्ति के भांति सोचने लगे थे, महाराज जी का चिंतन अक्सर इस शरीर के नश्वरता पर रहता था, संत शिरोमणि का चिंतन प्रायः इस बात पर था कि  जब यह शरीर नश्वर है एक दिन सबको जाना ही है तो धन संपदा और नाते रिश्तो का क्या करना l प्रेमानंद जी का बैरागी मन अक्सर यह सोचता रहता कि सभी सदस्य एक न एक दिन मर जाएंगे तो फिर मेरा इस दुनिया में कौन, मैं मैं किसके पास रहूंगा l

समय के साथ महाराज जी की उम्र बढ़ती गई, जब हुए लगभग 13-14 साल के थे, तो सन्यास का विचार उनके मन में पूरी तरह से घर बसा चुका था, एका बैरागी मन इस नाशवान शरीर तथा संपदा को छोड़ने का निश्चित कर चुका था  l उन्होंने ठान लिया था घर परिवार छोड़कर भगवान के पास जाना ही उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य है l

परंतु उनके सन्यास के रास्ते में एक बहुत बड़ी बाधा थी, जिससे पार पाना महाराज जी के लिए बहुत कठिन था, वह बाधा कोई और नहीं बल्कि महाराज जी की मां थी, जिनसे बिना आज्ञा लिए हुए सन्यास धारण नहीं कर सकते थे, प्रेमानंद जी महाराज जी का अपने मां से बड़ा स्नेह था, इसीलिए उन्होंने अपने मन की बात सबसे पहले अपनी माता से कहना उचित समझा…..

उन्होंने अपनी मां को अम्मा संबोधित करते हुए कहा… अम्मा मेरा इस सांसारिक जीवन में मन नहीं लगता, मेरा मन हमेशा भगवान को पाने के लिए व्याकुल रहता है, ऐसा लगता है  जैसे घर और इस सांसारिक जीवन का त्याग करके भगवान को पा जाऊं l

प्रारंभ में तो Premanand Ji Maharaj की मां को लगा कि अभी प्रेमानंद जी की उम्र बहुत कम है शायद यह प्रवचन और संगतो का एक थोड़े समय का प्रभाव है, जो समय के साथ शांत हो जाएगा, परंतु ऐसा नहीं था… l विधाता को तो कुछ और ही मंजूर था, प्रेमानंद जी ने निश्चित कर लिया था उन्हें  सन्यास लेना है,l

प्रेमानंद महाराज जी के ही शब्दों में… मां ने उन्हें भजन कीर्तन की सलाह दी l, महाराज जी आगे बताते हैं…… अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उनके मन में अजीब सी व्याकुलता जागृत हुई, उन्हें ऐसा प्रतीत होने लगा कि जैसे यह घर गृहस्ती उनके लिए नहीं है, बल्कि उनका जीवन सन्यास में ही है, और मात्र 13 -14 वर्ष की अवस्था में उन्होंने घर का त्याग कर दिया l

Premanand Ji Maharaj

 

प्रेमानंद महाराज जी की शिक्षा  Premanand Ji Maharaj

महाराज जी की शिक्षा के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त नहीं है, ज्ञात स्रोतों से पता चलता है कि उन्होंने 13-14 वर्ष की अवस्था में सन्यास धारण कर लिया था l उस वक्त महाराज जी संभवत नौवीं क्लास में पढ़ रहे थे l इससे आगे की शिक्षा का मुझे ज्ञान नहीं है l

 

प्रेमानंद जी महाराज का सन्यासी जीवन Premanand Ji Maharaj

 

जिस अवस्था में बालक अपने खेलकूद तथा शरारतेl में व्यस्त रहते हैं, उस अवस्था में महाराज जी का चिंतन अलौकिक  tha, महाराज जी अक्सर सन्यासी जीवन तथा नाशवान शरीर के बारे में सोचते रहते थे, 13- 14 वर्ष की अवस्था में उन्होंने पूर्ण रूप से संन्यास ले लिया था , महाराज जी की आज अभी ज्यादा नहीं थी, यह आयु सन्यास के संघर्षों के लिए नहीं वरन माता-पिता तथा घर के सुख भोग के लिए होती हैl परंतु विधाता को तो कुछ और ही मंजूर था, विधाता के ही प्रेरणा से महाराज जी ने 13 -14 वर्ष की आयु में सन्यास ग्रहण कर लिया था  l

सन्यास के उपरांत महाराज जी की तपोस्थली प्रारंभ में वाराणसी थी l वाराणसी में तपस्या के दौरान महाराज जी की दिनचर्या नियत थी, वह प्रतिदिन गंगा स्नान तीन बार किया करते थे फिर चाहे ठंड कहीं मौसम क्यों ना हो l गंगा के घाट पर पीपल का वृक्ष उनकी तपस्थली थी, यहीं पर वह बैठकर महादेव का ध्यान लगाया करते थेl

Premanand Ji Maharaj

खाने के लिए महाराज जी पूर्ण रूप से भिक्षा पर आश्रित थे, महाराज जी के ही शब्दों में वह अक्सर 10 से 15 मिनट भिखारियों के साथ लाइन में बैठ जाया करते थे, इस दौरान उन्हें जो मिल जाता था वही खाकर गुजारा होता था, कई बार 10 से 15 मिनट में उन्हें भिक्षा नसीब नहीं होती थी तो वह भूखे पेट भी सोए हैं l इस दौरान वे सिर्फ गंगाजल पीकर ही जीवन यापन करते थे l

इस दौरान महाराज जी अपना अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि, उन्हें जब कोई रोटी अथवा खाना खाते समय दिख जाता था, तो उन्हें ऐसा प्रतीत होता था,,… जैसे वह व्यक्ति दुनिया का सबसे भाग्यशाली हो…… l

 

प्रेमानंद महाराज जी का वृंदावन आगमन…Premanand Ji Maharaj

 

Premanand Ji Maharaj ka अपने तपोस्थली वाराणसी से वृंदावन आने का प्रसंग बहुत ही रोचक है,.. महाराज जी आगे बताते हैं कि अपनी दिनचर्या के अनुसार गंगा स्नान करके पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान लगाए बैठे रहते थे, l  महाराज जी वाराणसी से वृंदावन आने का श्रेय भगवान महादेव के प्रेरणा को मानते हैं, इसी कारण उनके मन में वृंदावन देखने तथा वृंदावन के बारे में जानने की इच्छा प्रबल हो गई  l

प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि 1 दिन वह अपने नियमानुसार तुलसी घाट पर बैठे थे, तभी एक संत उनके पास आए जिनको महाराज जी नहीं जानते थे उन संत महोदय ने महाराज जी से कहा……

श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी का अंध विश्वविद्यालय जो काशी में स्थित है, उसमें श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा एक आध्यात्मिक  आयोजन का प्रबंध किया गया है, जिसमें दिन में श्री चैतन्य लीला एवं राष्ट्र में रासलीला का मंचन होगा  l आप भी हमारे साथ चलें l

प्रारंभ में प्रेमानंद जी  महाराज जी ने संत महोदय के साथ चलने से मना कर दिया, परंतु संत महोदय के बार-बार कहने पर महाराज जी को लगा शायद यह प्रभु भोलेनाथ की इच्छा है, इसलिए उन्होंने साथ चलने के लिए हां कर दिया  l

महाराज जी स्वभाव से एकांत जीवन व्यतीत करने वाले संत थे, उन्होंने अपने जीवन काल में कभी रासलीला नहीं देखी थी, रामलीला जरूर एक दो बार देखी थी.. तो उन्हें ऐसा लगा यह रासलीला  रामलीला की भक्ति ही एक रात में खत्म हो जाएगी l परंतु विधि को कुछ और ही मंजूर था.. l महाराज जी आगे बताते हैं……..

जब उन्होंने रासलीला को प्रथम रात्रि में देखा, तो उनका मन रासलीला में ऐसा रामा की उन्हें रासलीला देखते 1 महीने कब बीत गए पता ही नहीं चला  l

अब रासलीला मंडली के वापस वृंदावन जाने का समय आ गया था l परंतु महाराज जी का man रासलीला को बार-बार देखने के लिए व्याकुल हो रहा था l क्योंकि यह कलाकार हमेशा कहीं न कहीं लीलाओं का मंचन करते रहते थे,इसलिए महाराज जी ने सोचा अगर मैं इनके साथ लग जाऊं तो मुझे रोज लीला देखने को मिलती रहेगी इसके बदले में इनकी सेवा करता रहूंगा लिए

महाराज जी ने ऐसा ही भाव लेकर तीन संचालक के पास पहुंच गए और उन्हें प्रणाम करते हुए अपने मनोभाव उन्हें बताएं… उन्होंने यह कहा कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए वह सिर्फ लीला देखना चाहते हैं उसके बदले वह उनकी तथा पूरे कलाकारों की सेवा करते रहेंगे l

संचालक महोदय ने बड़े ही विनम्र भाव से उन्हें मना कर दिया l लेकिन महाराज जी की प्रबल इच्छा के आगे संचालक महोदय ने बस इतना ही कहा

बाबा तू बस एक बार वृंदावन आजा बिहारी जी तुझे छोड़ेंगे नहीं l

आगे Premanand Ji Maharaj कहते हैं यही वह वाक्य थे जिसने मेरे पूरे जीवन को बदल कर रख दिया l

 

वृंदावन वाले महाराज  Premanand Ji Maharaj

 

रासलीला मंडली के जाने के कई दिनों तक महाराज जी वाराणसी में ही रहे, परंतु उनका मन वृंदावन में था  l महाराज जी कुछ समय के बाद स्वामी जी की सलाह से और श्री नारायण दास भक्त माली के एक शिष्य की मदद से मथुरा जाने को तैयार हो गए l

Premanand Ji Maharaj वृंदावन में किसी से परिचित नहीं थे l परंतु वृंदावन पहुंचने के बाद उन्हें यह कभी नहीं लगा कि वह बृंदावन पहली बार आए हैं l उनके दिन की शुरुआत वृंदावन की परिक्रमा और श्री बांके बिहारी जी के दर्शन करना थाl महाराज जी पूरा दिन राधावल्लभ जी को देखते रहते थे l और धीरे-धीरे उनका मन राधा रानी के चरणों में ऐसे रामा कि आज वृंदावन में राधा रानी के गुणों की जाप करने वाले प्रमुख संतों में उनका नाम आता है l

 

महाराज जी की आध्यात्मिक संस्था  Premanand Ji Maharaj

 

वृंदावन में महाराज जी का श्री हित केली कुंज नाम का  एक आध्यात्मिक संगठन है, इस संगठन की स्थापना प्रेमानंद महाराज जी द्वारा की गई हैl महाराज जी का मुख्य उद्देश्य वृंदावन में विभिन्न धार्मिक कार्यों को करना और उन के माध्यम से प्रेम और शांति को भारत समेत पूरे विश्व में फैलाना है l

 

महाराज जी का शारीरिक स्वास्थ्य  Premanand Ji Maharaj

 

वर्तमान समय में महाराज जी लगभग 60 साल के हो चुके हैं, परंतु उनमें युवाओं की भांति ऊर्जा है, जिसका प्रमुख कारण उनकी एक नियमित दिनचर्या है  l उनके चेहरे का तेज उनके तपस्वी संयमित जीवन को दर्शाती है l

कहां जाता है लगभग 15 वर्षों से उनके दोनों गुर्दे खराब है, महाराज जी को पॉलीसिस्टिक किडनी रोग है जिसे संक्षिप्त में पीकेडी कहा जाता है जोकि किडनी की एक वंशानुगत बीमारी है यह माता-पिता से संतान में आती है  lलेकिन इसके बावजूद भी अभी वह एक स्वस्थ जीवन जी रहे हैंl महाराज जी अपने जीवन का श्रेय राधा रानी की भक्ति को मानते हैं, उनका कहना है कि मैंने अपना जीवन राधा रानी के चरणों के समर्पित कर दिया है  l

प्रेमानंद जी महाराज और विराट कोहली  Premanand Ji Maharaj

 

विराट कोहली प्रेमानंद जी महाराज के विचारों से अत्यधिक प्रभावित हैं l हाल ही में जब वह अपनी पत्नी श्रीमती अनुष्का शर्मा के साथ वृंदावन आए  तो महाराज जी के दर्शन हेतु आश्रम गए थे, तथा कुछ समय तक महाराज जी के प्रवचन ओं को भी सुना था  l

प्रेमानंद जी महाराज से जाने भगवान की प्राप्ति कैसे होगी?

 

महाराज जी कहते हैं हम सब उसी भगवान के ही अंश है, हमारी स्थिति भगवान के बच्चे के समान है, जिस प्रकार पिता की संपत्ति पर बच्चे का अधिकार होता है उसी प्रकार प्रभु की भक्ति पर उनके बच्चे अर्थात हमारा अधिकार है l और जिस प्रकार हम पिता की सेवा करके पिता द्वारा दी गई संपत्ति को अपनाते हैं, ठीक उसी प्रकार हम भी प्रभु द्वारा बताए गए मार्ग में चलकर, गरीब दीन दुखियों की सेवा करके प्रभु को पा सकते हैं  l

 

प्रेमानंद जी महाराज के बारे में कुछ रोचक जानकारियां

 

**प्रेमानंद जी महाराज ने लगभग 13 14 वर्ष की अवस्था में संन्यास ले लिया था

**प्रारंभिक तपस्थली महाराज जी के वाराणसी रही है

**महाराज जी प्रारंभ में भोलेनाथ के परम भक्त थे

**वृंदावन आने का श्रेय महाराज जी भोलेनाथ की ही महिमा बताते हैं

**चैतन्य लीला तथा रासलीला ने वृंदावन आने के लिए महाप्रभु को व्याकुल कर दिया

**महाराज जी के दोनों किडनी खराब है यह एक अनुवांशिक बीमारी के कारण है

**किडनी खराब होने के कारण महाराज जी को एक बार आश्रम से निकाला भी जा चुका है

**महाराज जी खुद कहते हैं कि उन्हें अपने उच्च जाति पर अहंकार था जिसे उनके गुरु ने भोलेनाथ की कृपा से समाप्त कर दिया

 

 

महाराज जी का संपर्क सूत्र Premanand Ji Maharaj

पता…. श्री हित के लिए कुंज वृंदावन परिक्रमा मार्ग, वृंदावन उत्तर प्रदेश  लिए

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प्रेमानंद जी महाराज से जुड़े प्रश्न Premanand Ji Maharaj

 

प्रश्न  प्रेमानंद जी महाराज कौन है

उत्तर  प्रेमानंद जी महाराज राधा रानी के परम भक्त हैं

प्रश्न  Premanand Ji Maharaj कहां रहते हैं

उत्तर प्रेमानंद जी महाराज वर्तमान में वृंदावन उत्तर प्रदेश में रहते हैं

प्रश्न Premanand Ji Maharaj की उम्र क्या है

उत्तर 60 वर्ष

प्रश्न  प्रेमानंद जी महाराज का स्वास्थ्य कैसा है

उत्तर  प्रेमानंद महाराज जी की दोनों की दुनिया फेल है परंतु अभी वह स्वस्थ हैं

 

निवेदन🙏🙏

Premanand Ji Maharaj की जीवन की प्रमुख घटनाओं को आपके समक्ष लाने का मैंने पूरा प्रयास किया है, इस प्रयास में कहीं कमी और गलती हो जाए तो उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं  l और मेरा यह प्रयास अगर आपको सार्थक लगे तो इस लेख को अपने मित्रों के साथ शेयर अवश्य करें🙏l

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