लाचित बरफुकन का जीवन परिचय और निबंध 2023 Lachit Borphukan Essay In Hindi

भारत की भूमि बहुत से महान योद्धा पैदा हुए, जिन्होंने समय-समय पर अपनी बहादुरी के कारनामों से भारत का नाम रोशन किया, साथ ही अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा भी किया l इन्हीं वीर योद्धाओं में अहोम साम्राज्य को गौरवान्वित करने वाले लचित बोरफुकान हैं l

अगर आप लचित बोरफुकान के बारे में जानना चाहते हैं तो यह लेख Lachit Borphukan Essay In Hindi आपके लिए ही लिखा गया है, इस लेख के माध्यम से असम के महान योद्धा,  लचित बोरफुकान और उनकी वीर गाथाओं को आपके सामने रखा जाएगा l

Lachit Borphukan Essay In Hindi लचित बोरफुकान पर निबंध

असम के इतिहास में लचित बोरफुकान का अपना एक अलग और विशिष्ट स्थान है, l असम के इतिहास को अगर देखा जाए तो पता चलता है लचित बोरफुकान अजेय  व्यक्तित्व ,साहस और संघर्ष की मिसाल है l वह एक महत्वकांक्षी कूटनीतिक, दूरदर्शी एवं  शक्तिशाली राजनेता थे l जिन्होंने अपनी देशभक्ति से अहोम साम्राज्य को ना सिर्फ बचाया बल्कि उस को गौरवान्वित भी किया l

 

लचित बोरफुकान का जन्म 24 नवंबर 1622 को असम में स्थित अहोम साम्राज्य में हुआ था l उनके पिता का नाम मोमाई तमोली बोर बरू था, जोकि राजा प्रताप सिंह के शासनकाल में एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी थे l अहोम  साम्राज्य ब्रह्मपुत्र घाटी के पूर्वी क्षेत्र के भाग का एक नाम है l संभवतः इसकी स्थापना 1228 में किया गया था l

अहोम राज्य एक सुखी और संपन्न राज्य था, जो कि प्राकृतिक एवं आर्थिक तथा सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण था l इस कारण अहोम  साम्राज्य पर दिल्ली सल्तनत के तुर्क, अफगान तथा उसके बाद मुग़ल साम्राज्य के शासकों द्वारा लगातार हमले किए जा रहे थेl मुगल साम्राज्य के पूर्व जितने भी हमले थे इतने घातक नहीं थे, जो अहोम साम्राज्य को नुकसान पहुंचा सके  l

कहा जाता है अहोम साम्राज्य काफी शक्तिशाली था, साम्राज्य की सेना अपने राज्य के लिए समर्पित थी और अपनी जान देने के लिए भी तैयार थी  l यही कारण है कि मुगल असम को छू नहीं सके, l

भारत में असम के अहोम शासक ही एकमात्र ऐसे शासक थे जिन्होंने मुगलों को कई बार युद्ध में परास्त किया l लचित बोरफुकान असम के महान सेना नायकों में एक हैं, जिनके नेतृत्व में अहोम साम्राज्य ने 1671 में सराय घाट की लड़ाई जीती थी l इस युद्ध में लचित बोरफुकान अस्वस्थ होने के बावजूद निराश और हताश सैनिकों में जोश का संचार कियाl

लचित बोरफुकान का पूरा जीवन मुगलों से संघर्ष करते हुए बीता, उन्होंने मुगलों के खिलाफ अपने अंतिम समय तक युद्ध किया तथा कई युद्ध मुगलों से जीते भी l

सराई घाट की लड़ाई : यह लड़ाई सन 1671 में सराई नदी के घाट पर मुगलों और अहोम साम्राज्य के मध्य हुई थी l अहोम साम्राज्य की तरफ से लचित बोरफुकान ने सेना का नेतृत्व किया थाl तथा मुगल सेना का नेतृत्व आमेर के राजा राम सिंह ने किया था lकहा जाता है कि इस लड़ाई में लचित बोरफुकान काफी अस्वस्थ थे तथा उनके सैनिक निराशा के भाव से ग्रस्त  l लचित बोरफुकान अपनी सेना में जोश भर कर अपनी नेतृत्व क्षमता को साबित किया l

दोनों सेनाओं के मध्य यहां पर भीषण युद्ध हुआ,l  मुग़ल की ओर सेना का नेतृत्व आमेर के राजा राम सिंह किया lलेकिन लचित बोरफुकान ने अपनी सेना का नेतृत्व करते हुए  अपनी सैन्य कुशलता का लोहा मनवाया तथा वह सराय घाट की लड़ाई में विजय हुए और मुगलों के हाथ से गुवाहाटी पुनः प्राप्त करने में सफल रहे l

इस युद्ध का प्रभाव यह पड़ा की औरंगजेब ने असम को जीतने का ख्याल अपने मन से निकाल दिया, तथा आगामी मुगल शासकों ने भी असम को जीतने का ख्याल अपने मन में कभी नहीं लाया l यह लचित बोरफुकान का दृढ़ता मनोबल तथा सैन्य  कुशलता का ही परिणाम है ,कि मुगल सेना नायक आमेर के राजा राम सिंह को 5 अप्रैल 1971 को असम छोड़ना पड़ा l

 

लचित बोरफुकान की पृष्ठभूमि : ( Lachit Borphukan Essay In Hindi)    लचित बोरफुकान का असली नाम लचित डेका है  l उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि सेना से रही है, उनके पिताजी तत्कालीन साम्राज्य के सैन्य कमांडर थे  l

 

लचित बोरफुकान का निधन :(Lachit Borphukan Essay In Hindi  )    सराई घाटी के युद्ध के  समय से ही लचित बोरफुकान अस्वस्थ चल रहे थेl इस युद्ध के ठीक 1 वर्ष बाद 25 अप्रैल 1672 को बीमारी के कारण लचित बोरफुकान की मृत्यु हुई l जब उनकी मृत्यु हुई वह केवल 39 वर्ष के थेlलेकिन असम के लोग आज भी उनकी वीरता को याद रखते हैं तथा उनकी वीरता और सराई घाटी युद्ध में उनकी अदम्य साहस बहादुरी और सैनिक कुशलता के लिए, उनके सम्मान में पूरे असम राज्य में हर साल 24 नवंबर को लचित दिवस मनाया जाता है  l

लचित दिवस मनाने का उद्देश्य लचित बोरफुकान के मूल्यों को बढ़ावा देना तथा लोगों में राष्ट्र के प्रति देशभक्ति  को जगाना है l लचित बोरफुकान के सम्मान में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के शीर्ष  कैडेट को स्वर्ण पदक दिया जाता है l

असम की तीन दिवसीय यात्रा पर जब राष्ट्रपति रामनाथ गोविंद जी गए थे तो असमिया राष्ट्रवाद के नायक लचित बोरफुकान की 400 वीं स्मरण उत्सव का शुभारंभ किया था l

 

निष्कर्ष :    लचित बोरफुकान न केवल एक महान योद्धा थे बल्कि असम और भारत के इतिहास में एक महान मूल्यों वाले व्यक्ति थे l वह सही मायनों में एक सच्चे देशभक्त है जो स्वयं तो देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे देने को तैयार थे तथा अपनी सेना में भी जोश भर कर उन्हें देश की रक्षा के लिए समर्पित करने के लिए तैयार कर लेते थेl उन्होंने अपने सैनिकों को उनकी मातृभूमि और उनकी स्वतंत्रता के लिए लड़ने को  प्रेरित किया l और उनकी विरासत असम और उसके आगे के लोगों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी l

लचित बोरफुकान जैसे सेनानायक सिर्फ असम के ही इतिहास को नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष के इतिहास को गौरवान्वित करते हैं l बोर फुकन की वीरता पूरे देश के लिए आदर्श और प्रेरणा का स्रोत है l तथा आज की पीढ़ी को उनसे प्रेरणा लेकर विपरीत परिस्थितियों में भी अपने साहस को कैसे बनाए तथा देश के प्रति  कैसे समर्पित रहे यह सीखा जा सकता है  l    जय हिंद 🙏🙏

 

कुछ शब्द(Lachit Borphukan Essay In Hindi )

प्रिय पाठकों आज मैंने अपने लेख Lachit Borphukan Essay In Hindi के माध्यम से एक महान सेनानायक तथा दूरदर्शी व्यक्तित्व को आपके सामने रखने का प्रयास किया है, बच्चों में अगर कोई त्रुटि हो तो उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं  l अगर कोई सुझाव हो तो कमेंट बॉक्स में कमेंट अवश्य कीजिएगा l

तथा आप और महान व्यक्ति के जीवन के बारे में जानना चाहते हैं, तो मेरे व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप को अवश्य ज्वाइन करें 🙏🙏

 

 

 

 

 

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