जग्गी वासुदेव ‘सद्गुरु’ जीवन परिचय 2023 Jaggi Vasudev ‘Sadhguru’ Biography right now

जग्गी वासुदेव ‘सद्गुरु’ जीवन परिचयJaggi Vasudev Sadhguru Biography

 

आज इस लेख के माध्यम से हम आपको Jaggi Vasudev ‘Sadhguru’ Biography के बारे में पूरी जानकारी देंगेl

यह लेख  आपको सद्गुरुJaggi Vasudev के जीवन परिचय, परिवार,शिक्षा,कैरियर, ईशा फाउंडेशन,उनको प्राप्त पुरस्कार आदि के बारे में बताया जाएगा l

 Jaggi Vasudev

 

सद्गुरु को आप कहीं ना कहीं यूट्यूब वीडियो के माध्यम से सुनते होंगे या फिर आपने कहीं ना कहीं इनके बारे में सुना जरूर होगा लेकिन इनके संपूर्ण जीवन के बारे में बहुत कम लोगों को पता है, जिसमें आप सभी लोगों के कई सवाल हो सकते हैं जैसे सद्गुरु कौन हैं, सद्गुरु के आश्रम का क्या नाम है, सद्गुरु का जन्म कहां हुआ है ,इनका बचपन कहां बीता ,सद्गुरु के परिवार, सद्गुरु में कौन सी किताब लिखी, आदि तथा उनके आश्रम की फीस क्या है, ऐसे सवाल आपके मन में होंगे, l

आपके ऐसे ही तार्किक और जिज्ञासा भरे सवालों के जवाब के लिए मैंने इस लेख को लिखा है.. तो चलिए इस लेख के माध्यम से सद्गुरु के संपूर्ण जीवन के बारे में जानने का प्रयास करते हैंl

Jaggi Vasudev

‘सद्गुरु’ जीवन परिचय

 नाम  जग्गी वासुदेव
 उपनाम सद्गुरु
जन्म दिनांक  3 सितंबर 1957
 जन्म स्थान  मैसूर कर्नाटक
 उम्र 65,वर्ष 2023 के अनुसार
 पिता डॉ वासुदेव
माता  श्रीमती सुशीला वासुदेव
 भाई 1
 बहन 2
 पत्नी  विजयाकुमारी बैंकर
 गुरु  योग गुरु श्री राघवेंद्र राव
 प्राथमिक शिक्षा मैसूर
 स्नातक  मैसूर यूनिवर्सिटी
 धर्म  हिंदू
 राष्ट्रीयता  भारतीय
 हॉबी  लिखना, घूमना, प्राकृतिक गतिविधि
 पेशा लेखक, मोटिवेशन स्पीकर, योग गुरु, आध्यात्मिक गुरु, जीवन प्रबंधन आदि
पुरस्कार  पदम् बिभूषन 2017

भारत ही हीं विश्व भर में प्रसिद्ध सद्गुरु जग्गी वासुदेव के बारे में हर कोई जानना चाहता है, उनकी तर्कपूर्ण बातें मानव हृदय को छू जाती हैं, उनका संदेश मानवतावादी है, तथा सद्गुरु के विचार मानव जीवन के अनुभव पर आधारित है  l जब वह बोलते हैं तो उनके बोलने कि लय हृदयस्पर्शी होती है l Jaggi Vasudev

 

दुनिया भर में सद्गुरु  के लाखों फॉलोवर्ष है, यह ईशा फाउंडेशन नामक लाभ  रहित मानव सेवा संस्था के संस्थापक भी हैं ईशा फाउंडेशन भारत समेत संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड ,सिंगापुर ,ऑस्ट्रेलिया ,देशों में अपना कार्यक्रम चलाता है, इसे संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक परिषद में विशेष सलाहकार की पदवी भी प्राप्त है  l सद्गुरु द्वारा 8 भाषाओं में 100 से अधिक पुस्तकों की रचना भी की गई है ll

सद्गुरु Jaggi Vasudev  का जन्म 5 सितंबर सन 1957 को कर्नाटक राज्य के मैसूर में हुआ था l सद्गुरु का योग की ओर आकर्षण बचपन से ही था, यह प्रायः प्रकृति की गोद में बैठ कर ध्यान में चले जाया करते थे, कहा जाता है कि उन्होंने योग का अभ्यास मात्र 11 वर्ष से ही प्रारंभ कर दिया था, प्रकृति की ओर आकर्षण ने इनके योग में और वृद्धि की, इन्हें योग की शिक्षा श्री राधवेंद्र राव द्वारा मिली  l

सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी जब 25 वर्ष के थे तो उनके जीवन में एक असामान्य घटना हुई, इस असमान घटना के कारण उन्होंने सुखों का त्याग कर दिया था, अब उनका झुकाव आध्यात्म की ओर होने लगा था, उनके कहे अनुसार अब उन्हें अलग ही अनुभव होने लगा था, उन्हें लगता था जैसे अब वह शरीर में नहीं है, बल्कि प्रकृति के हर हिस्से जैसे पानी, पेड़, चट्टान, आदि मे वह समाहित है l अपने इन्हीं अनुभव को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उन्होंने सुखों का त्याग कर दिया और आध्यात्मिक जीवन जीने लगे l

वर्तमान समय में सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी की पहचान एक महान लेखक, विचारक, मोटिवेशन स्पीकर के रूप में है, प्रायः  यह  देखा गया है कि जब आदमी जिंदगी की भागदौड़ और उलझनों से गुजरता है तो इसके जवाब सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी बड़े ही साधारण तरीके से और तार्किक शब्दों के साथ देते हैं, जो आपको रास्ता बताने के साथ ही आपके मार्ग को भी प्रशस्त करते हैंl

सद्गुरु Jaggi Vasudev का परिवार 

 पिता  डॉ वासुदेव
 माता  सुशीला वासुदेव
 भाई 1
 बहन 2
 पत्नी  विजय कुमारी ‘ बैंकर ‘ विवाह 1984 में महाशिवरात्रि के दिन ( मृत्यु 23 जनवरी 1997)
 बेटा  कोई नहीं
 बेटी  राधे जग्गी ( एकमात्र संतान )
 चाचा  ज्ञात नहीं

 Jaggi Vasudev

सद्गुरु Jaggi Vasudev का प्रारंभिक जीवन

 

सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी का जन्म मैसूर में हुआ था जो कि वर्तमान कर्नाटक में है, इनके पिता रेलवे में डॉक्टर थे, अतः जग्गी वासुदेव जी को प्रारंभ से ही एक अच्छा परिवेश मिला था l सद्गुरु बचपन से ही एक विलक्छण प्रतिभा  के धनी थे, उन्हें प्रारंभ से ही प्रकृति के बीच में रहना तथा घूमना फिरना पसंद था, कहां जाता है कि उन्होंने योग का अभ्यास अपनी 11 वर्ष की उम्र से ही प्रारंभ कर दिया था  l

कहां जाता है इस सद्गुरु का बचपन से ही स्वभाव कुछ अलग ही था, जब भी यह किसी वस्तु को देखते थे तो उसे लगातार देखते ही रहते थे और उनकी आंखें आंसुओं से भर जाती थी l सद्गुरु का प्रकिति से लगाओ बचपन से ही था, वह प्रकृति में ही अपने आप को अनुभव करते थे l और प्रकृति के बारे में जानने की उनकी जिज्ञासा उन्हें आध्यात्म  की ओर ले आई l

कहा जाता है कि 10 वर्ष के बाद सद्गुरु की भेंट योग गुरु राघवेंद्र राव जी से हुई, इन्हीं से सतगुरु ने योग विद्या सीखी, तथा सतत प्रयास के कारण इसमें महारत हासिल की  l जीवन का जो वर्तमान स्वरूप आप सद्गुरु का देख रहे हैं वह उनके योग के कारण ही संभव हुआ l

सद्गुरु के ही कहे अनुसार वह बचपन में अधिकांश समय जंगलों में बिताया करते थे वह पेड़ों पर बैठकर प्रकृति का आनंद लेते थे, उन्हें जंगली जानवरों खासकर विषैले सांपों वगैरा से कभी डर नहीं लगा  l प्रारंभ में सद्गुरु आर्मी ज्वाइन करना चाहते थे उनका झुकाव आर्मी ऑफिसर बनने की तरफ ज्यादा था l

सद्गुरु को बचपन से ही घूमने का बहुत शौक था, वह अक्सर बताते हैं कि प्रारंभ में उनके पास मोटरसाइकिल नहीं थी सिर्फ एक साईकिल थी, लेकिन वह साइकिल से भी काफी दूर-दूर तक यात्राएं कर लेते थे, आगे सdhगुरु बताते हैं कि जब उन्होंने मोटरसाइकिल ली तो उन्होंने मोटरसाइकिल से ही पूरे भारत का भ्रमण किया था,l

सdगुरु ने अपनी आध्यात्मिक यात्रा के पूर्व कुछ समय बिजनेस में भी अपना हाथ आजमाया था, जिसमें वह काफी सफल रहे थे, संभवत यह बिजनेस पोल्ट्री फॉर्म से संबंधित था  l और उन्होंने इस बिजनेस को 6 वर्ष लगभग किया था l

सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी का झुकाव योग और प्रकृति की तरफ हमेशा रहा है, उनके कहे अनुसार वह  योग करते थे तो उनका ध्यान अक्सर  लग जाता था, एक बार वह प्रसिद्ध चामुंडा पहाड़ी पर घूमने के लिए गए जहां कुछ समय के लिए वह ध्यान में मगन हो गए, परंतु उन्हें यह ध्यान नहीं रहा कि कितने समय तक वह ध्यान में है कितने घंटे बीत गए  l जब उन्हें  सुध  आई  तो उन्हें पता चला कि 5 से 6 घंटे बीत चुके हैं, यहीं से सद्गुरु की आध्यात्मिक यात्रा का शुभारंभ हो जाता है  l हालांकि कुछ लेखों और वीडियो में उनके ध्यान को 13 दिन तक बताया गया है lJaggi Vasudev

अब सद्गुरु अक्सर ध्यान में चले जाया करते थे, वह अपना बहुत सारा समय योग और ध्यान पर ही लगाने लगे, तब उनके आसपास के लोगों ने  इन्हें आध्यात्मिक पुरुष के रूप में देखना प्रारंभ कर दिया, l आगे चलकर सdगुरु ने अपना सारा कारोबार अपने एक विश्वसनीय मित्र को सौंप कर भारत की यात्रा पर निकल गए इसके बाद सद्गुरु Jaggi vasudev ने लोगों को योग सिखाना चालू कर दिया और एक योग टीचर ,मोटिवेशन स्पीकर ,और युग दृष्टा ,के रूप में इनकी पहचान पूरे भारत में छा गई l

सद्गुरुJaggi vasudev की शिक्षा

सद्गुरु की प्रारंभिक शिक्षा Demonstration school मैसूर में 1973 में पूरी की l मैसूर विश्वविद्यालय द्वारा सतगुरु ने अंग्रेजी साहित्य में स्नातक पूरा किया है l

सद्गुरुJaggi vasudev का कैरियर

सतगुरु ने आध्यात्मिक यात्रा के पूर्व कुछ समय बिजनेस भी किया है यह बिजनेस पोल्ट्री फॉर्म से संबंधित था जिसमें उन्होंने सफलता अर्जित की, आगे चलकर उन्होंने इस बिजनेस को दूसरे दूसरे हाथों में सौंप कर आध्यात्मिक राह पकड़ ली  l

ईशा फाउंडेशन की शुरुआत

ईशा फाउंडेशन एक गैर लाभकारी आध्यात्मिक संगठन है जिसकी स्थापना सद्गुरु जग्गी वासुदेव द्वारा 1992 में किया गया था l जोकि कोयंबटूर तमिलनाडु में स्थित है l इसी  सेंटर के बीचो बीच एक बहुत बड़ा शिवलिंग भी है जिसे आदि योगी के नाम से जाना जाता है और इसकी स्थापना सन 1999 में की गई थी lईशा फाउंडेशन का प्रमुख उद्देश्य योग को जन-जन तक पहुंचाना है ताकि मानवता और आध्यात्मिक विकास की यात्रा को सफल किया जा सके l इसके अतिरिक्त ईशा फाउंडेशन बहुत से सामाजिक तथा पर्यावरण कार्यक्रमों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है l

ईशा फाउंडेशन के ,किए प्रमुख कार्य निम्न है…

**ईशा फाउंडेशन द्वारा प्रोजेक्ट ग्रीनहैंड्स की स्थापना जो कि 2004 में तमिलनाडु में की गई, यह एक पारिस्थितिक तथा पर्यावरण        पहल है l

**2017 में नदियों में बढ़ते प्रदूषण को को जन जन तक पहुंचाना और जागरूकता लाना l

** 2022 का मिट्टी बचाओ आंदोलन अब तक का सबसे बड़ा पर्यावरणीय आंदोलन था l

सद्गुरू Jaggi vasudevको पुरस्कार और सम्मान तथा रिकॉर्ड

**सद्गुरु को पर्यावरण में सुधार के लिए 2008 में इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया इसके बाद 2017 में उन्हें आध्यात्मिक के लिए पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया l

**तमिलनाडु में 85200 पेड़ लगाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड

ईशा फाउंडेशन में एक साथ लाखों लोगों को योग सिखाने का रिकॉर्ड भी सद्गुरु के पास है l

सद्गुरु Jaggi vasudev द्वारा लिखी गई प्रमुख किताबें

सामान्यता सद्गुरु के व्याख्यान अंग्रेजी में होते हैं, परंतु उनकी किताबों को विश्व के 8 प्रमुख भाषाओं में प्रकाशित किया गया है, वर्तमान समय में सद्गुरु द्वारा 100 से भी ज्यादा किताबों को लिखा गया है  l इनकी प्रमुख किताबें निम्न है..

Pebbles of wisdom

Relationship

Emotion

Himalayan lust

Aadiyogi

Of mystics and mistakes

Etc….

112 फुट ऊंची आदियोगी

इस प्रतिमा का डिजाइनिंग स्वयं सद्गुरु जग्गी वासुदेव द्वारा किया गया था और और इस प्रतिमा का उद्घाटन वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2017 में किया गया, महाशिवरात्रि के दिन आदियोगी कि यह प्रतिमा आकर्षण का विशेष केंद्र होती है और यहां पर लाखों लोग इकट्ठा होते हैं, l

Jaggi Vasudev

सद्गुरू Jaggi vasudevकी कुल संपत्ति

सद्गुरु की कुल संपत्ति के बारे में मेरे पास कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है परंतु विभिन्न स्रोतों के माध्यम से जो पता चला है वह लगभग ढाई सौ करोड़ की संपत्ति सतगुरु के पास है l

सद्गुरु Jaggi Vasudev जी के बारे में रोचक तथ्य…

सद्गुरु का असली नाम जगदीश है

सद्गुरु को महंगी  बाइकों का शौक है

सद्गुरु के ऊपर उनकी पत्नी के उत्पीड़न का भी आरोप लग चुका है परंतु साबित नहीं हुआ

सद्गुरु के ऊपर पर्यावरण तथा जंगली जमीन के नुकसान के भी आरोप लग चुके हैं

 

  सद्गुरुJaggi Vasudevसोसल मीडियl

 

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निंम्न बायोग्राफी भी जाने 

सारा तेंदुलकर

रिंकू सिंह 

इशिता किषोर आईएएस 

 

 

FAQ

प्रश्न  सद्गुरू कौन है?

उत्तर  आध्यात्मिक गुरू विचारक योग गुरु लेखक आदि

प्रश्न  सद्गुरु कहां रहते हैं?

उत्तर  ईशा फाउंडेशन कोयंबटूर तमिल नाडु

प्रश्न  सद्गुरु का असली नाम क्या है?

उत्तर  जगदीश

प्रश्न सद्गुरु की कुल संपत्ति कितनी है?

उत्तर लगभग ढाई सौ करोड़

कुछ शब्द

अगर आपको यह मेरा प्रयास अच्छा लगा हो, तो मैं आपका हृदय से आभारी रहूंगा, अगर आप किसी फेमस पर्सन के बारे में जानना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में कमेंट जरूर करें  l

 

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