कबीर दास जी का जीवन परिचय 2023,About Kabir Das In Hindi

नमस्कार👏👏

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भक्ति काल के महान संत कबीर दास जी को शायद ही कोई नहीं जानता, जब भी धार्मिक रूढ़ियों पर प्रहार हो या फिर धार्मिक एकता के विषय में बात करनी हो तो संत कबीर के विचारों को सर्वोपरि रखा जाता हैl

About Kabir Das In Hindi

 

अगर आप भी उनके विचारों को जानना चाहते हैं तो आज मैं अपने लेख About Kabir Das In Hindi के माध्यम से आपको उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं ज्ञान तथा उनके विचारों को प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा l

कबीर दास जी के बारे में ( about Kabir Das in Hindi)

 

नाम

संत कबीर दास

अन्य नाम

कबीरदास, कबीर परमेश्वर,  कबीर साहब

जन्म

सन 1398

(विक्रम संवत 1455)

जन्म-स्थान

लहरतारा, काशी, उत्तर प्रदेश

पिता (पालने वाले)

नीरू (जुलाहे) मुस्लिम

माता (पालने वाली)

नीमा (जुलाहे) मुस्लिम

कर्म-क्षेत्र

●संत (ज्ञानाश्रयी निर्गुण)

●कवि

●समाज सुधारक

●जुलाहा

कर्मभूमि

काशी, उत्तर प्रदेश

शिक्षा

निरक्षर (पढ़े-लिखे नहीं)

पत्नी

लोई

बच्चे

● कमाल (पुत्र)

● कमाली (पुत्री)

गुरु

रामानंद जी (गुरु) सिद्ध, गोरखनाथ

विधा

कविता, दोहा, सबद

विषय

सामाजिक व अध्यात्मिक

मुख्य रचनाएं

सबद, रमैनी, बीजक, कबीर दोहावली, कबीर शब्दावली, अनुराग सागर, अमर मूल

भाषा

अवधी, सुधक्कड़ी, पंचमेल खिचड़ी भाषा

मृत्यु

सन 1519 (विक्रम संवत 1575) कही कही 1518 भी दिया है

मृत्यु-स्थान

मगहर, उत्तर प्रदेश

कबीर जयंती

प्रतिवर्ष जेष्ठय पूर्णिमा के दिन

कबीरदास जी का जीवन ( about Kabir Das in Hindi)

निराकार भक्ति शाखा के प्रमुख संत श्री कबीर दास जी का जन्म 14वी शताब्दी तथा 1398  मे उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में हुआ था l परंतु अभी भी कबीर दास जी के जन्म और स्थान के विषय में विरोधाभास हैl

कबीर दास जी का जन्म उस समय हुआ जब भारत में धार्मिक रूढ़ियों का बोलबाला था, तथा दूसरी तरफ मुस्लिम शासन होने के कारण, हिंदू धर्म पर भी प्रहार हो रहे थेl

कबीर दास जी निर्गुण ब्रह्म के उपासक और मानवतावादी संत थे l कबीरदास जी का दर्शन और विचार हिंदुओं के अद्वैतवाद तथा सूफी संतों के भावनात्मक रहस्यवाद का मिलाजुला रूप है l वे धार्मिक बंधनों से मुक्त थे, तथा जीव कल्याण उनकी आकांक्षा थी l इसके अतिरिक्त उन्होंने सिद्धों तथा नाथ योगियों से योग साधना तथा हठयोग को ग्रहण किया और वैष्णो se अहिंसा तथा प्रपत्ति भाव ग्रहण किया l

About Kabir Das In Hindi

कबीर दास जी ने अपनी अद्वैत विचार और दर्शन के अनुसार निर्गुण निराकार सर्व व्यापक और अविनाशी सत्ता को स्वीकार किया l वह मूर्ति पूजा पर विश्वास नहीं रखते थे, परंतु कभी मूर्तिपूजक ओं की अवहेलना भी नहीं की  l वह राम और रहीम को एक ही मानते थे l

इस्लाम के अनुसार कबीर का अर्थ बहुत बड़ा और महान होता है l वर्तमान समय में कबीर पंथ एक बहुत बड़ा धार्मिक समुदाय है जो कबीर के दिखाए हुए मार्ग पर चलता हैl तथा मानव सेवा को अपना परम कर्तव्य समझता है l वर्तमान में इस पंथ के मानने वाले शिष्यों को कबीरपंथी के नाम से जाना जाता है l

 

कबीरदास जी का बचपन

कबीर दास जी का जन्म 1398 में वाराणसी में हुआ था तथा मृत्यु 1518 में मगहर में हुआ l परंतु कबीर दास जी के जन्म स्थान स्थान के बारे में अभी भी विरोधाभास है l लेकिन ज्ञात तथ्यों से यह पता चला है कि कबीर दास जी का पालन पोषण एक गरीब मुस्लिम परिवार के द्वारा किया गया था l उनका स्वभाव बचपन से ही अध्यात्म की तरफ ज्यादा था l परंतु उनके स्वभाव में किसी धर्म और पंथ का विशेष प्रभाव नहीं पड़ा, उनके विचार प्रायः सभी धर्मों के अच्छे विचारों का योग है l

कई मिथकों के अनुसार ऐसा माना गया है कि उनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ और वे सीधे अवतरित हुए हैं l उनकी विशेष पहचान इस्लामिक और हिंदू साहित्य में रामानंद के शिष्य के रूप में ज्यादा है l

कुछ जन श्रुति के अनुसार नीरू और नीमा नाम के दंपत्ति ने कबीरदास जी को लहतरह झील के पास पाया  था l जो कि बुनकरों के एक गरीब मुस्लिम परिवार से थे l हम आपको बता दें कि कबीर दास जी के जन्म  तथा परिवार के बारे में काफी कम जानकारी उपलब्ध है l

कबीर दास की शिक्षा

कबीरदास जी संभवत निरक्षर थे, उन्होंने पढ़ाई नहीं किया था  l यह बात कबीर जी के एक लेख के द्वारा पता चलती है, जिसमें उन्होंने कहा है…….                                                मरि कागज छुओ नहि, कलम गह्यौ हाथ                             परंतु उनके द्वारा लिखे हुए काव्य तथा लेखों से यह प्रतीत नहीं होता कि वे निरक्षर थे l साधु  संत और फकीरों की संगति में बैठकर उन्होंने वेदांत उपनिषद और योग का पर्याप्त ज्ञान प्राप्त कर लिया था l तथा सूफी फकीरों की संगति ने उन्हें  इस्लाम धर्म के सिद्धांतों की भी जानकारी दी l और इसके अतिरिक्त देश का भ्रमण द्वारा उन्हें बहुत सारी जानकारियां प्राप्त हुई l

कबीरदास जी  के गुरु

कबीर दास जी का प्रारंभिक जीवन एक मुस्लिम परिवार में बीता  परंतु वह उस समय के हिंदू भक्ति शाखा के गुरु रामानंद जी से काफी प्रभावित थे l

कहा जाता है कि प्रारंभ में रामानंद जी ने कबीर दास जी को नीच जाति का समझ कर अपना शिष्य बनाने से इंकार कर दिया था,l तब एक दिन कबीर दास जी गंगा तट पर जाकर सीढ़ियों पर लेट गए जहां रामानंद जी प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान किया करते थे l और अंधेरे में रामानंद जी का पैर कबीरदास जी पर पड़ा तब कबीर दास जी के मुख से राम राम शब्द निकला तभी से रामानंद जी ने कबीर दास जी को अपना शिष्य मान लिया l हालांकि कुछ विद्वानों ने प्रसिद्ध सूफी संत फकीर शेख कबीर दास जी का गुरु माना, लेकिन सर्वाधिक माननीय मत यही है कि उनके गुरु रामानंद जी थे  l

कबीरदास जी का दर्शन तथा तथा विचार

कबीर दास जी का दर्शन अद्वैतवाद पर आधारित है, अद्वैतवाद का मतलब होता है, दो ना होकर एक l अर्थात ईश्वर एक है, जिसे विभिन्न मतों और धर्मों में बांटा नहीं जा सकता  l

जीवन के बारे में कबीर दास जी का दर्शन बहुत स्पष्ट था वह जीवन को बेहद सादगी से जीने में विश्वास रखते थे l तथा समस्त जगत में एक ही ईश्वर को मानते थे, l ओ राम और रहीम को एक ही मानते थे, l कबीर दास जी ईश्वर के निर्गुण रूप को स्वीकार करते थे, इसीलिए वे मूर्तिपूजक ओं के आडंबर ओं का विरोध करते थे  l लेकिन वह सिर्फ हिंदू समुदाय के ही आडंबर का विरोध नहीं करते थे बल्कि मुस्लिम संप्रदाय में फैली आडंबर तथा अंधविश्वास के खिलाफ भी उन्होंने बड़ी सजगता के साथ बोला l

“कबीर पाथर पूजे हरि मिलै, तो मैं पूजूँ पहार।

 

 कबीर के प्रिय शिष्य धर्मदास थे। कबीर अशिक्षित थे। लेकिन वह ज्ञान और अनुभव  से समृद्ध थे। सद्गुरु रामानंद जी की कृपा से कबीर को आत्मज्ञान तथा प्रभु भक्ति का ज्ञान प्राप्त हुआ। बचपन से ही कबीर एकांत प्रिय व चिंतनशील स्वभाव के थे।

      उन्होंने जो कुछ भी सीखा। वह अनुभव की पाठशाला से ही सीखा। वह हिंदू और मुसलमान दोनों को एक ही पिता की संतान स्वीकार करते थे। कबीर दास जी ने स्वयं कोई ग्रंथ नहीं लिखें। उन्होंने सिर्फ उसे बोले थे। उनके शिष्यों ने, इन्हें कलमबद्ध कर लिया था।

 

 

       इनके अनुयाईयों व शिष्यों ने मिलकर, एक पंथ की स्थापना की। जिसे कबीर पंथ कहा जाता है। कबीरदास जी ने स्वयं किसी पंथ की स्थापना नहीं की। वह इससे परे थे। यह कबीरपंथी सभी समुदायों व धर्म से आते हैं। जिसमें हिंदू, इस्लाम, बौद्ध धर्म व सिख धर्म को मानने वाले है।

कबीर की निर्गुण भक्ति

कबीरदास जी नाम में विश्वास रखते थे रूप में नहीं, उनका मानना था कि ईश्वर अविनाशी है उसका कोई रूप नहीं है वह समस्त जगत के कण-कण में व्याप्त है तथा उसे नाम सुमिरन द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है  l

कबीर दास जी की साधना मानने से नहीं जानने से आरंभ होती है l

About Kabir Das In Hindi

कबीर दास जी की सामाजिक चेतना

कबीर दास जी ने उस समय के भारतीय समाज में व्याप्त अनेक विकृतियों पर तार्किक प्रहार किया है और साथ ही हिंदू और इस्लाम दोनों धर्मों में विद्यमान धार्मिक सामाजिक आडंबर तथा कर्मकांड ओं का उन्होंने विरोध किया है l वह हिंदुओं के मूर्ति पूजा तथा बहुत देर बाद के विरोधी थे, उनका मानना था ईश्वर निर्गुण रूप में है तथा संसार के समस्त कण कण में व्याप्त है.. l उन्होंने दोनों धर्मों के आडंबर ओं को इंगित करते हुए इस दोहे को कहा था…

 

प्रत्येक जीव को परम तत्व का अंश बताकर उन्होंने मानव समानता और बंधुत्व का विचार दिया समाज में व्याप्त जातिभेद ऊंच-नीच अस्पृश्यता इत्यादि का  उन्होंने कड़े शब्दों में निंदा की वह मनुष्य के ज्ञान व कर्म को महान मानते हुए कहते हैं..

‘जाति न पूछो साधु की पूछ लीजिए ज्ञान  , मोल करो तलवार का पड़ा रहने दो म्यान’

कबीर दास जी उस समय भारतीय समाज में व्याप्त धार्मिक और जाति जो वैमनस्यता थी उसकी भी निंदा की है, तथा वे पारस्परिक प्रेम सद्भाव बंधुता इत्यादि मानवीय भावनाओं को महत्वपूर्ण मानते हैं..

”पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय , ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय”

 

कबीर दास जी की मानवीय चेतना….

 

कबीर दास जी एक मानवतावादी चिंतक हैं, उन्होंने जीव को परमात्मा का अंश माना है तथा प्रत्येक जीव को परमात्मा का अंश बताकर हिंदू मुस्लिम एकता स्थापित करने का प्रयास किया l उनकी यह भावना भारतीय संस्कृति के अनुसार वसुदेव कुटुंबकम को प्रेरित करती हैl अर्थात वह पूरे विश्व को एक कुटुंब मानते हैं l

कबीर दास जी लोक कल्याणकारी भावना के प्रबल समर्थक थे कबीर ने प्रभु भक्ति  के साथ-साथ कर्म करने पर भी बल दिया है उनके अनुसार प्रभु भक्ति  वैराग्य लेने जंगल में जाकर रहने अथवा भूखे प्यासे रहने से नहीं मिल सकते l प्रभु की भक्तों के साथ-साथ हमें जीव को उपार्जन की भी व्यवस्था करनी चाहिए l उनकी शिक्षा हमें कर्म प्रधान बनने की ओर अग्रसर करती है l

धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भारत के लिए हमें आदर्श समाज की रूपरेखा कबीर के संदेशों में मिलती है l आज 21 वी सदी के विश्व में जहां भारत अपनी वैश्विक पहचान स्थापित करना चाहता है वहां कबीर के संदेश हमारे मार्गदर्शक हो सकते हैं l

कबीर दास जी की मृत्यु

 

कबीर दास जी की मृत्यु 1518 में मगहर में हुई थी l कहा जाता है कि उस समय यह मान्यता प्रचलित थी उसकी मृत्यु काशी में होगी वह सीधा स्वर्ग जाता है, इस मान्यता को तोड़ने के लिए कबीर दास जी ने अपने जीवन के आखिरी समय के लिए मगहर को चुना था l

कहा जाता है कि कबीर दास जी देह त्यागने के उपरांत उनके भक्तों तथा हिंदू एवं मुस्लिम पक्ष में विवाद भी उत्पन्न हुआ था l क्योंकि हर पक्ष यह चाहता था कि कबीर दास जी का आखरी प्रिया उनके धर्म के अनुसार हो l

 

कबीर दास जी के बारे में संक्षिप्त जानकारी…

1.कबीर दास जी का जन्म 1398 लह तारा तथा मृत्यु 1518 मगहर में हुई थीl

2. कबीर दास जी का पालन पोषण नीलू एवं नीमा नाम के जुलाहे दंपत्ति ने किया था l

3. कबीरदास जी का विवाह लोई नामक महिला के साथ हुआ था, तथा उनकी दो संताने थी l

4. कबीर दास जी के पुत्र का नाम कमाल तथा पुत्री का नाम कमाली था

5. वैष्णव संत रामानंद जी कबीर दास जी के गुरु थे l

6. कबीर दास जी के वचनों को गुरु वाणी में स्थान दिया गया है l

7. कबीर दास जी निर्गुण भक्ति शाखा के संत हैं l

 

कबीरदास जी पर प्रश्न उत्तर…..

प्रश्न. कबीर दास जी का जन्म कब और कहां हुआ?

उत्तर. 1398 लहतारा

प्रश्न. कबीर दास जी की मृत्यु कब और कहां हुई?

उत्तर. 1518 मगहर

प्रश्न. कबीर दास का पालन पोषण किसने किया?

उत्तर. नीरू और नीमा नामक जुलाहे दंपत्ति ने

प्रश्न. कबीर दास जी का मूल नाम क्या है?

उत्तर. संत कबीर दास

प्रश्न. कबीरदास के गुरु का क्या नाम है?

उत्तर. वैष्णव संत रामानंद जी

प्रश्न. कबीरदास कितना पढ़े हैं?

उत्तर. वह निरक्षर थे, उन्हें जो भी ज्ञान हुआ वह उनके अनुभवों के आधार पर हुआ  l

प्रश्न. कबीरदास के कितने बच्चे थे?

उत्तर. दो

लेखक की विनती 🙏🙏

प्रिय पाठक गण मैंने अपने लेख about Kabir Das in Hindi के माध्यम से कबीर दास जी के बारे में बताने का पूरा प्रयास किया है l लेकिन कबीर दास जी के जीवन को एक छोटे से लेख के माध्यम से पूरा नहीं किया जा सकता l अतः मेरे लेख about Kabir Das in Hindi जो कमी रह गई हो उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं l

 

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