कबीर दास का जीवन परिचय 300 शब्दों में 2023Kabir Das ka Jivan Parichay 300 Shabdon mein

कबीर दास का जीवन परिचय 300 शब्दों में

भारतीय संस्कृति की संत परंपरा में कबीर दास जी का अपना एक विशिष्ट स्थान है, जहां अन्य संतों का दर्शन भक्ति पर आधारित है, वही कबीर दास जी अध्यात्मिक दर्शन तथा विचार भक्ति  के साथ सुधारवादी भी है l वे मानव जीवन में अंधविश्वास और अतार्किक बातों पर कठोर प्रहार करते हैंl

कबीर दास जी का जन्म 1398 में वाराणसी मे हुआ तथा मृत्यु 1518 में मगहर में हुई l जन श्रुतियों के अनुसार उनके माता-पिता ब्राह्मण थे,l कहा जाता है कि कबीर दास जी को उनकी माता ने जन्म के उपरांत वाराणसी के निकट लहतारा नामक तालाब के तट पर छोड़ दिया था l वहां से गुजरते हुए नीरू और नीमा नामक जुलाहे दंपत्ति ने कबीर दास जी को उठा लिया और उन्हीं दंपत्ति ने उनका पालन पोषण किया l

कबीर दास जी वैष्णो संत रामानंद जी से काफी प्रभावित थे, तथा बाद में उनके प्रमुख शिष्य बने l कबीर दास जी के जन्म और स्थान के बारे में ज्यादा जानकारी उनके लेखों के माध्यम से ही मिलती है… जैसे…

काशी में हम प्रगट भये, रामानंद चेताये।

कबीर दास जी एक गृहस्थ संत हैं, लोई नामक महिला से उनका विवाह हुआ था l तथा कमाल और कमाली नामक उनके दो संतान थी l जो क्रमशाह बेटा और बेटी थी,l

 

कबीर दास जी की शिक्षा…

कबीर दास जी निरक्षर थे, उन्होंने जो सीखा वह संत संगती तथा अपने अनुभव से सीखा l उनके लेख प्रायः उनके उनके बोलने पर उनके शिष्यों द्वारा लिखे जाते थे l

 

कबीर दास जी की प्रमुख रचनाएं

कबीर दास जी ने किसी विद्यालय से शिक्षा प्राप्त नहीं की, परंतु उनके लेखों में उनकी शिक्षा की कमी कहीं नहीं झलकती l उन्होंने साधु-संतों तथा अपने गुरु रामानंद द्वारा वेद उपनिषद गीता, तथा अन्य धर्मों की भी अच्छी बातों को सीखा था, जो उनके लेखों के माध्यम से झलकती है  l उनके प्रमुख लेख हैं.. सबद, रामाईनी, तथा बीजक l

तू कहता कागद की लेखी, मैं कहता आंखन की देखी।

कबीर ने साखियों (दोहों), सबदों और रमैनियों की रचना की है जिसका संग्रह ‘बीजक’ में हुआ है।

 उनकी भाषा शैली अवधी, भोजपुरी,राजस्थानी तथा पंजाबी का सम्मिश्रण है l

वर्तमान में कबीर दास जी की उपयोगिता

 

वर्तमान 21वीं सदी में जब दुनिया के साथ भारत भी आगे बढ़ रहा है और कबीर दास जी के विचार तथा दर्शन भारत को मार्ग दिखा सकते हैं l

 

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